पतहर

पतहर

खामोशी और चुप्पी के कवि विनोद कुमार शुक्ल

पतहर,गोरखपुर। हिंदी के विख्यात कवि–कथाकार नवासी वर्षीय विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहें। दो दिन पूर्व उन्होंने रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। आज उनकी स्मृति में गोरखपुर की प्रतिनिधि साहित्यिक संस्था गतिविधि की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। विषय था— ‘ सदी की आवाज़ विनोद कुमार शुक्ल के महाप्रयाण पर’। गूगल मीट पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में देश भर के महत्वपूर्ण लेखकों ने शिरकत की और अपने प्रिय कवि की स्मृति को साकार करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। 
वक्ताओं ने विनोद कुमार शुक्ल के साहित्यिक अवदान की चर्चा करते हुए उनके कवि–व्यक्तित्व को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना। लोगों की राय में विनोद कुमार शुक्ल आज के भोंपू समय में चीख –पुकार के बीच खामोशी और चुप्पी के कवि थे। उनकी कविता अपने समय के साथ –साथ, समय के आगे और समय के पीछे बार – बार देखती है। उनके देखने का यह अंदाज अत्यंत विरल और आधुनिक हिंदी कविता के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है। 
डेढ़ घंटे तक चले गूगल मीट की इस श्रद्धांजलि सभा में भोपाल से प्रतिष्ठित कवयित्री प्रज्ञा रावत, बस्ती से वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल, अयोध्या से प्रतिष्ठित कवि स्वप्निल श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ से सुपरिचित कवि अर्पण कुमार, गोरखपुर से वरिष्ठ आलोचक एवं संस्कृतिकर्मी प्रो० अरविंद त्रिपाठी, प्रसिद्ध समाजवादी विचारक प्रो० चितरंजन मिश्र और वरिष्ठ कवि प्रो० अनंत मिश्र समेत डा प्रभा सिंह, श्रीमती नूतन मिश्र, प्रो० विमलेश मिश्र सहित देश भर के नई और पुरानी पीढ़ी के सैकड़ों रचनाकार, संस्कृतिकर्मियों ने इस श्रद्धांजलि सभा के जरिए कवि विनोद कुमार शुक्ल के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रगट की । अबाध गति से सम्पन्न हुए इस श्रद्धांजलि सभा का सफल संचालन एवं संयोजन युवा साहित्यकार रजनीश पाण्डेय और संस्था की ओर से आभार ज्ञापन युवतम कवि अचिंत्य मिश्र ने किया।

Post a Comment

0 Comments